Home चंद्रपूर  रेत उत्खनन पर चुप्पी से महसूल प्रशासन पर बड़ा सवाल.

रेत उत्खनन पर चुप्पी से महसूल प्रशासन पर बड़ा सवाल.

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  • कारण बताओ नोटिस जारीकर भद्रावती तहसीलदार कर रहे खाना पूर्ति.
    दो सप्ताह बीतने के बाद भी करवाई नहीं.
    संवाददाता।।माजरी.
    ‌ भद्रावती तहसील में दर्जनों रेतघाट अब रेत माफियाओं के साथ ही महसूल विभाग के अधिकारियों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गया है.राज्य सरकार के खजाने में मिलने वाले करोड़ों रुपये राजस्व को रेत माफिया- महसूल अधिकारी गठबंधन ने अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति समझ रखी है.जिसका ताजा उदाहरण पटाला-रालेगांव ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत वर्धा नदी का मनगांव रेत घाट पर देखने को मिल रहा है.एक सप्ताह बाद भी अभी तक दोषियों पर कारवाई नहीं हुई है.राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रेत माफिया निश्चिंत होकर इस घाट के बगल से प्रतिदिन सैकड़ों ब्रास रेत पोकलैंड मशीन और स्टीमर के द्वारा निकालकर बड़े बाजारों में धड़ल्ले से बेचने के साथ ही चोरी-छुपे अन्य स्थानों पर भी बरसात के समय ऊंचे कीमत पर बेचने के लिए बड़े पैमाने पर रात के समय स्टाक कर रहे हैं,मनगांव रेत घाट वणी-वरोरा हाइवे से महज कुछ ही दूरी पर है लेकिन सच्चाई जानने के लिए महसूल विभाग का कोई भी अधिकारी रेतघाट तक जाकर सच्चाई से अवगत होने के लिए जाने की जहमत नहीं उठाई.अपने तथा अवैध रूप से रेत उत्खनन करने वाले माफियाओं को बचाने के लिए खानापूर्ति का काम शुरू करते हुए घाट के ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जबकि सचाई यह है कि रेतघाट के ठेकेदार ने पत्र के माध्यम से रेत चोरी होने की सूचना अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में जिलाधिकारी कार्यालय में देने का दावा किया.एक माह बाद भी बदस्तूर रेत चोरी बहुत बड़ी घोटाले की तरफ इशारा करता है.मेंन हाइवे से दिन-रात रेत का परिवहन जारी है.राजनीतिक छत्रछाया में यह काला व्यवसाय महसूल विभाग के कृपा से खूब फल-फूल रहा है.इस विषय मे तहसीलदार बात करने के लिये तैयार नहीं है.जबकि जिलाधिकारी को भी इस गम्भीर विषय में जानकारी दे दी गयी है.

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