तहसीलदार राजेश भण्डारकर व मण्डलाधिकारी समीर वाटेकर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप.

माजरी!!

भद्रावती तालुका में गौण खनिजों के अवैध उत्खनन से एक सौ दस करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान के मामले में नागपुर विभागीय आयुक्त कार्यालय जिलाधिकारी चन्द्रपुर को तत्काल जांच व कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं. भद्रावती तहसील प्रशासन पर लापरवाही व सांठगांठ के आरोप लगने व पुनः जाँच के आदेश से खलबली मच गई है.इस मामले में शिकायतकर्ता ने दोषी अधिकारियों पर फौजदारी के कारवाई की मांग की है.
माजरी निवासी वीरेंद्र उर्फ बबलू राय के शिकायत पर यह मामला जनवरी 2025 से चल रहा है. नंदोरी मंडल में 96,632 ब्रास मिट्टी का अवैध उत्खनन व बोगस रॉयल्टी से परिवहन पकड़ा गया. तहसीलदार राजेश भण्डारकर व मंडल अधिकारी समीर वाटेकर ने शुरुआत में चुप रहे. वरिष्ठ अधिकारियों व मन्त्रालय तक शिकायत किये जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के लिखित आदेश के बाद 30 मई 2025 से जांच कार्य शुरू किया गया.तहसीलदार राजेश भण्डारकर और मण्डलाधिकारी समीर वाटेकर के संरक्षण में अवैध उत्खनन हुआ और इन अधिकारियों ने करोड़ों रुपये की वित्तीय लाभ कमाया. अवैध उत्खनन में सम्मिलित दोनों अधिकारी मे. सोनाई इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ जाँच किये,और इन्हीं के आशीर्वाद से हजारों ब्रास अवैध उत्खनन और परिवहन हुआ.जबकि यह जाँच कार्य विभाग के ही तटस्थ अधिकारियों से निष्पक्ष करवाना था.लेकिन दोषी अधिकारियों से ही जाँच करवाकर प्रशासन द्वारा इन्हें बचाने का कार्य किया गया. यदि ईमानदारी से पुनः तटस्थ टीम से जाँच की जाए तो महसूल विभाग को एक सौ दस करोड़ से आधिक राजस्व की प्राप्ति होने की पूर्ण सम्भावना है. शिकायतकर्ता ने दावा है कि इन्हीं अधिकारियों ने ईंट भट्ठा मालिकों से भी रिश्वत लेकर मिट्टी के चोरी को अभयदान देकर हर महीने करोड़ों के राजस्व का नुकसान कर ईंट भट्ठा संचालकों को खुली छूट दे रखी है.
मौका-परीक्षण में नुकसान की पुष्टि हुई, जिससे यह साबित होता है कि महसूल विभाग के भद्रावती तहसीलदार व मण्डलाधिकारी के संरक्षण में अवैध उत्खनन हुआ है. इसके बाद भी मामला ठण्डे बस्ते में ही रह गया,फिर अप्रैल 2026 में पुनः शिकायत पर विभागीय आयुक्त शरद चंद्रकांत कांबले ने डिजिटल हस्ताक्षरित पत्र जारी कर चन्द्रपुर जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपने व शिकायत कर्ता को सूचित करने को कहा है.
भद्रावती तहसीलदार तथा मण्डलाधिकारी पर पद के दुरुपयोग व भ्रष्टाचार के आरोप हैं. अब सवाल उठ रहा है की क्या दोषी अधिकारियों पर सख्ती होगी या पूरा जिला प्रशासन अपने भ्रष्ट अधिकारीयों को बचाकर मामले में लीपापोती कर इनके काले करतूतों पर पर्दा डालने का कार्य करता है. इसपर समस्त जिलावासियों की निगाहें टिकी है।